World cup 2023 Final match analysis – भारत के हार के मुख्य 8 कारण

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World cup 2023 Final match analysis

इस बार का आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2023 (ICC Men’s Cricket World cup 2023) भारत में 5 अक्टूबर 2023 से 19 नवंबर 2023 तक खेला गया। इस विश्व कप में 10 टीमों (इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड, भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ़्रीका, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नीदरलैंड) ने भाग लिया। इस वर्ल्ड कप में फाइनल मैच सहित कुल मिलाकर 48 मैच खेले गए।

इस वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मैचों में भारत ने न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने दक्षिण अफ़्रीका को हराकर फाइनल में अपनी जगह बनाई। फाइनल में भारत का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ। पूरे विश्व कप में अच्छा खेलने वाली एवं लगातार 10 मैच जीतकर अंक तालिका में पहले स्थान पर रहने वाली भारत को ऑस्ट्रेलिया ने अहमदाबाद के क्रिकेट स्टेडियम में 6 विकेट से मात देकर ट्रॉफी अपने नाम की। आज इस लेख/आर्टिकल में भारत के हार के मुख्य कारणो के बारे में पता लगाएंगे। इन कारणों पर विस्तार से अपनी दिल की बात करने के लिए आज हमारे साथ है, एक क्रिकेट प्रेमी और क्रिकेट एक्सपर्ट जो भारत को फाइनल में इस तरह हारते देख बहुत दुःखी है। हमारे क्रिकेट एक्सपर्ट मुनीश तिवारी (लालगांव-रीवा,मध्य प्रदेश) ने आज अपनी दिल की बात को इस लेख में समेटा है।

 

World cup 2023 Final match analysis
Image Credit: ICC, BCCI, Google | World cup 2023 Final match analysis

 

वर्ल्डकप 2023 फाइनल मैच विश्लेषण 🏆:- World cup 2023 Final match analysis

 

मेरा क्रिकट के प्रति पहला झुकाव 

शुरूआत करते है कुछ पुरानी बातों से, बात 2003 वर्ल्डकप (जो साउथ अफ्रीका में खेला गया था) के फाइनल की है जब मै लगभग 9-10 साल का था उसी समय उस वर्ल्डकप से मेरा और मेरे जैसे कई युवाओं का क्रिकेट मे इंट्रेस्ट बढ़ रहा था, संयोग से भारत फाइनल मे भी पहुंच चुका था। फाइनल मैच साउथ अफ्रीका के जोहान्सबर्ग के वाडंर्स स्टेडियम मे खेला गया जहां उसका सामना उस समय की अजेय टीम ऑस्ट्रेलिया से हुआ।

  • उस समय पर मेरा maturity(परिपक्वता) लेवल काफ़ी कम था इसीलिए लगा की इंडिया ही मैच जीतेगी। उस समय वर्ल्डकप में उस ऑस्ट्रेलिया को हराना किसी भी टीम के लिए लगभग असंभव सा था, हर खिलाड़ी उस टीम का मैच विनर था परिणाम स्वरुप ऑस्ट्रेलिया ने आसानी से भारत को फाइनल मे हरा कर वो वर्ल्डकप जीता।
  • नीचे मेरे द्वारा लिखी बात पढ़ने से पहले मै आप लोगों को एक बात स्पस्ट करना चाहुँगा कि मै अपनी भारतीय टीम का एक क्रिकेट प्रशंसक हूँ और खिलाड़ी के रूप मे कल भी टीम के साथ था आज भी साथ हूँ और आगे भी साथ रहूँगा, बस हार से ज्यादा दुःख हार के तरीके पर है जिस प्रकार की ये हार हुई😞 है।
  • आप मेरी बातों से सहमत और असहमत दोनों हो सकते है, जो भी बाते मैं लिख रहा हूँ वो अपने 20 साल के क्रिकेट देखने और खेलने के अनुभव के आधार पर लिख रहा ☺️🏏हूँ।

 

 

वर्ल्डकप 2023 में भारत के हार के मुख्य कारण

अब बात करते है 2023 वर्ल्डकप के फाइनल मैच की, वह फाइनल जिसमे भारतीय टीम अपने घर मे खेल रही थी ऑस्ट्रेलिया से ज्यादा मजबूत भी थी और इस वर्ल्डकप में कोई भी टीम भारत को हरा भी नहीं सकी थी –

    1. सबसे बड़ा सवाल BCCI पर है, BCCI ने फाइनल मैच के लिए जिस मैदान का चयन किया था, क्या वो भारत के लिए फेवरबल (अनुकूल) था ?

इसका जवाब है शायद नहीं, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया को बड़े ग्राउंड में खेलने की आदत है उनके बड़े ग्राऊंड होते है, जबकि अपने देश के खिलाड़ी नार्मल 55-65 मीटर कि बाउंड्री मे अक्सर खेलते है। कुछ लोगों का कहना क्या पहले से पता था कि ऑस्ट्रेलिया और भारत का फाइनल होगा, मेरा जवाब है जब सचिन तेंदुलकर जैसा महान प्लेयर बोल रहा है टॉप -4 टीम मे इंडिया, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड जा सकती है तो भाई इन 4 टीम्स मे ही ना 2 टीम फाइनल खेलेंगी। अगर 2011 की तरह इस बार भी फाइनल मैच का वेन्यू मुंबई का वानखेड़े मैदान होता तो रिजल्ट कुछ और हो सकता था क्योंकि वहां पर इंडियन टीम ने अहमदाबाद की तुलना मे कई गुना ज्यादा मैच खेल रखें है।

    2. क्या हार्दिक पाण्डेया का इंजरी रिप्लेसमेंट मे जो प्लेयर लिया गया क्या वो प्लेयर सचमुच पाण्डेया का रिप्लेसमेंट था क्योंकि पाण्डेया तो आलराउंडर थे ?

हार्दिक पाण्डेया के रिप्लेसमेंट के तौर पर प्रसिद्ध कृष्णा को टीम के साथ जोड़ा गया लेकिन प्रसिद्ध कृष्णा प्योर फ़ास्ट बॉलर है। अब यहाँ पर बड़ा सवाल खड़ा होता है क्या बड़े टूर्नामेंट के लिए BCCI के पास 150 करोड़ की आबादी वाले भारत देश मे जहां लाखों से भी ज्यादा की संख्या मे युवा क्रिकेट खेल रहें है, केवल ऐसे आलराउंडर पाण्डेया पर डिपेंडेंट है जिसके साथ लगातार फिटनेस कंसर्न रहता है। वही दूसरी ओर BCCI ऑस्ट्रेलिया से सीखें 2 मेडियम पेस आलराउंडर स्टोनिक्स और कैमरून ग्रीन बेंच मे थे और 2 अच्छे स्पिन आलराउंड विकल्प मैक्सवेल और ट्रेवीस हेड प्लेइंग -11 मे मौज़ूद थे।

 

 

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    3. क्या भारत के कप्तान और कोच को फाइनल मैच में एक्स्ट्रा गेम अवेरनेस दिखाने की जरुरत थी ?

बड़ा मैच फाइनल मैच वो भी वर्ल्डकप का वो भी अपने घर में यहाँ पर कप्तान और कोच को एक्स्ट्रा गेम अवेरनेस की जरुरत थी, लेकिन जब हमारे कप्तान ने गेम अवेरनेस नहीं दिखाई तो बाक़ी खिलाड़ियों से क्या उम्मीद की जा सकती है। कप्तान साहब लगातार 2 बॉल पर 10 रन (6 और 4) आने के बाद क्या अगली गेंद पर मैक्सवेल को फिर आगे निकल मारना सही था।

  • शायद इस ख़राब शॉट के लिए रोहित अपने आपको जिंदगी भर कोसेगे हम लोग भले रोहित की 47 रनो की तेज पारी के कारण उनको माफ कर दें, लेकिन वो कभी अपने आपको माफ़ नहीं कर पाएंगे। क्योंकि सबको पता था ऑस्ट्रेलिया को सबसे ज्यादा डर बल्लेबाज़ी में अगर किन्ही खिलाड़ियों से था तो वो थे रोहित, कोहली और के. एल. राहुल। बाद में कोहली और राहुल की उपयोगी पारियो की मदद से टीम का सम्मानजनक स्कोर 240 तक पहुँच सका।

अगर रोहित के आउट होने के तरीके को छोड़ दिया जाए तो कोहली शॉटपिच बॉल को रोकने के प्रयास मे बॉल थोड़ा सा ज्यादा बाउंस ले गई और दुर्भाग्यपूर्ण तरीके बैट पर लगने के बाद विकट पर जा लगी। रही बात राहुल की तो उनकी पारी जरुरत ज्यादा स्लो हो गई लेकिन वो भी मज़बूरी मे जब वो देख रहें थे की सामने कोई प्लेयर रुक नहीं पा रहा है लगातार विकेट गिर रहें है उन्होंने रन बनाने के बजाय विकेट पर रुके रहने को ही प्राथमिकता दी, उसी का परिणाम था कि भारत 50 ओवर पूरा खेल पाया, नहीं तो 40-45 ओवरो मे आल आउट हो सकता था वो भी 200 रन बनाकर।

    4. श्रेयस, गिल और सूर्या 3 मे से 2 खिलाड़ी अगर 30-30 या 35 रन भी बना दिए होते तो, टीम का स्कोर 240 कि जगह 270-280 पहुँच सकता था ?

अगर ये खिलाड़ी मैच में कुछ रनो का योगदान देते तो मैच का रिजल्ट कुछ ओर हो सकता था, पिछले मैचों मे जब कोहली नॉनस्ट्राइक पर रहते थे तभी स्ट्राइक पर रहने वाले खिलाड़ी का हौंसला बुलंद रहता था और वो तेजी से रन बनाता था और कोहली लगातार उसको स्ट्राइक देते रहते थे,चाहे श्रेयस हो या राहुल।

    5- पूरे वर्ल्डकप मे आप जिस बैटिंग और बोलिंग आर्डर के साथ सभी टीम को बड़े मार्जिन से हारते आए हो फिर फाइनल जैसे बड़े मैच मे उस आर्डर मे 2 बड़े फेरबदल क्यों?,

पहला फेरबदल- सूर्या टॉप आर्डर के बैट्समैन है उनको ज्यादा नीचे बैटिंग करने का अनुभव कम है,6 नंबर मे बैटिंग करना ही उनके लिए लोअर था फिर भी आपने जडेजा को सूर्या ऊपर भेज दिया, जब सूर्या खेलने आए तो उसके नीचे के जो 4 बैट्समैन जो बचें थे उनकी बैटिंग कितनी योग्यता थी वो सबको पता ही 😞 है। सूर्या जैसे बैट्समैन के खिलाफ बहुत अच्छा प्लैन करके आई थी ऑस्ट्रेलिया मिड ऑन मिड ऑफ ऊपर लिया दोनों थर्डमैन को फाइन किया बोलिंग मे जोश हेज़लवुड 4 लगातार स्लोवर बॉउंसर और सूर्या फ़्रस्ट्रेशन मे विकेट थ्रो करके चले गए, वर्ल्डकप के फाइनल मे प्योर बैट्समैन के हैसियत से खेल रहें एक खिलाड़ी के पास शॉट की सीधी कमी दिखी, जो की दुःखद 😞 है।

दूसरा फेरबदल- बोलिंग मे पूरा टूर्नामेंट स्ट्राइक बॉलर बुमराह और सिराज थे फाइनल मे आपने सीधा सिराज की जगह शमी को दूसरा ओवर दें दिया जो बाक़ी मैचों मे पहले बदलाव के रूप मे बोलिंग करने आते थे इसीलिए वो स्विंग को कंट्रोल ही नहीं कर पा रहें थे, नतीजा सबके सामने है रन भी ज्यादा खाये और 1 मात्र विकेट ही मिल पाया बस वो भी बहुत बाहर की बॉल पर जबकि इस मैच से पहले 1St चेंज आते थे तो ज्यादातर मैचों मे 4,5 से 7 विकेट तक लिए।

 

    6. सिराज स्ट्राइक बोलिंग ना देने के बाद भी 1St चेंज भी नहीं लाए ना ही 2nd चेंज, बल्कि पांचवे बॉलर के रूप मे लाये ?

जब आप अपने स्ट्राइक बॉलर को 17-18 ओवर बाद जब बॉल पुरानी हो गई है जब ओवर के लिए ला रहे हो तो इससे सिराज का मोराल भी थोड़ा डाउन हो गया और उन्हें वो स्विंग भी नहीं मिल पाई, माना की बाद मे ओस पड़ने के चान्सेस थे जिससे स्पिनर को बॉल ग्रिप करने मे परेशानी का सामना करना पड़ता, लेकिन 240 रनो वाले चेसिंग के मैच मे इतना लम्बा सोचना ही क्यों, आजके मॉडर्न क्रिकेट मे ये बहुत कम ही पॉसिबल है की कोई टीम पूरा 50 ओवर खेल जाए और 240 रन भी चेस ना कर पाए।

    7. क्या आपको ये बात पता है की आपकी टीम केवल विकेट ले कर ही इस मैच को जीत सकती थी ?

फिर आपने स्पिन बोलिंग मे स्लिप क्यों नहीं लगाई, जबकि जडेजा की बॉल पर लबुशाने का 1 ऐज और कुलदीप की बॉल पर हेड का 1 ऐज स्लिप के पास से ही बॉल निकली थी जो की अगर स्लिप होती वो कैच मे कन्वर्ट हो सकता था।

    8- अगर किसी टीम को चैंपियन बनना है तो ऑस्ट्रेलिया को फाइनल में आने ही मत दो ?

ऊपर लिखी हुई बातों से भी सबसे बड़ी बात अगर कोई टीम वर्ल्डकप जैसा खासकर 50-50 फॉर्मेट का वर्ल्डकप जीतने के बारे मे सोच रही है तो उसको नाकआउट मैचों मे ऑस्ट्रेलिया से पार पाना होगा। सन 1999, 2003 और 2007 तीन बार लगातार वर्ल्ड चैंपियन के साथ टोटल 6 बार की वर्ल्डकप विजेता टीम। भारत ने भी 2011 मे क्वार्टर फाइनल मे ऑस्ट्रेलिया को हराया तो भारत  चैंपियन बनती है, 2015 मे फिर से ऑस्ट्रेलिया चैंपियन, 2019 मे सेमीफाइनल मे इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को हराया और इंग्लैंड चैंपियन बना, 2023 फिर से ऑस्ट्रेलिया 😞का वर्ल्डकप पर कब्ज़ा।
ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को अगर हराना है तो केवल खेल बस से नहीं खिलाड़ियों को मानसिक रूप से भी बहुत मजबूत रहना होगा और उस टीम खिलाफ एक अच्छी टीम के साथ एक अच्छी और मजबूत रणनीति के साथ ग्राउंड पर उतरना होगा 👍🏏🏆🥇

 

 

 

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3 thoughts on “World cup 2023 Final match analysis – भारत के हार के मुख्य 8 कारण”

  1. बहुत ही सटीक एनालिसिस किया है आपने भैया।
    आपके सारे ही प्वाइंट वैलिड हैं, 100% सहमत।

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